By पं. नीलेश शर्मा
शिव के प्रति गहन भक्ति के साथ करें रुद्राभिषेक, जानें प्रत्येक अर्पण का विशेष महत्व

सावन भगवान शिव से गहरा संबंध स्थापित करने का श्रेष्ठ समय है। सावन 2025 के आगमन के साथ ही भक्त रुद्राभिषेक की तैयारी में लग जाते हैं। रुद्राभिषेक शिवलिंग का पवित्र सामग्रियों से अभिषेक है, जिसके साथ रुद्र, चमकं या महामृत्युंजय मंत्र का जप किया जाता है। हर द्रव्य केवल प्रतीक नहीं बल्कि ऐसी आध्यात्मिक ऊर्जा रखता है जो साधक को शिव और ब्रह्मांड से जोड़ती है।
नीचे रुद्राभिषेक में प्रयुक्त पारंपरिक द्रव्य, उनके संस्कृत नाम, उच्चारण (Transliteration) और आध्यात्मिक महत्व दिए गए हैं।
अर्थ: शुद्धता, समर्पण और भावनात्मक शांति का प्रतीक।
मन को शांत करता है।
अर्थ: पोषण, करुणा और भावनात्मक शुद्धि।
चिंता को कम करता है।
अर्थ: मधुरता और एकता।
संबंधों में प्रेम बढ़ाता है।
अर्थ: प्रकाश और आत्मसमर्पण।
बुद्धि को तेज़ करता है।
अर्थ: समृद्धि और प्रसन्नता।
आर्थिक वृद्धि लाता है।
अर्थ: पूर्ण समर्पण और शुद्धिकरण।
चिंता और आसक्ति दूर करता है।
अर्थ: स्वास्थ्य और भावनात्मक स्थिरता।
परिवार में आनंद लाता है।
अर्थ: शरीर, मन, बुद्धि, अहं और आत्मा की शुद्धि।
शिव पूजा का मुख्य अंग।
अर्थ: ठंडक और एकाग्रता।
ध्यान को गहरा करता है।
अर्थ: शिव प्रिय अर्पण।
त्रिपत्री शिव के त्रिगुण का प्रतीक।
अर्थ: नश्वरता और वैराग्य।
अहंकार को जलाता है।
सावन का प्रत्येक सोमवार अद्भुत फल देता है। श्रद्धा से अभिषेक करने पर साधक को आंतरिक शांति, आध्यात्मिक शक्ति और मानसिक संतुलन प्राप्त होता है।
1. सावन में रुद्राभिषेक का सबसे शुभ दिन कौन सा है?
सावन सोमवार और प्रदोष तिथि सबसे शुभ मानी जाती है।
2. क्या घर पर रुद्राभिषेक किया जा सकता है?
हां, पूर्ण श्रद्धा से घर पर भी कर सकते हैं।
3. क्या पंचामृत के बिना रुद्राभिषेक अधूरा है?
नहीं, पर पंचामृत से किया गया अभिषेक अत्यंत शुभ माना जाता है।
4. कौन सा मंत्र सबसे प्रभावी है?
महामृत्युंजय मंत्र और रुद्रपाठ अत्यंत शक्तिशाली माने जाते हैं।
5. क्या सभी द्रव्य एक ही अभिषेक में उपयोग करना आवश्यक है?
नहीं, अपनी श्रद्धा और सुविधा अनुसार किसी भी द्रव्य का उपयोग कर सकते हैं।
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