By पं. अभिषेक शर्मा
जानिए आठवें भाव में सूर्य की उपस्थिति से जीवन में आने वाले मानसिक, आध्यात्मिक और व्यावसायिक बदलावों का गहन विश्लेषण

कुंडली का आठवां भाव वैदिक ज्योतिष में अत्यंत गहन और रहस्यमय माना गया है। यह भाव जन्म और मृत्यु के रहस्यों, जीवन के अनदेखे पक्षों, आकस्मिक घटनाओं, आध्यात्मिक जागरण और परिवर्तनकारी अनुभवों का प्रतिनिधित्व करता है। सूर्य जब इस भाव में स्थित होता है तो वह व्यक्ति के जीवन में गहरी ऊर्जा और विशिष्ट अनुभव लेकर आता है। इस स्थिति में सूर्य व्यक्ति को सामान्य जीवन पथ से हटाकर जीवन की अनिश्चितताओं और गूढ़ सचाइयों का सामना कराता है।
सूर्य आत्मबोध और शक्ति का प्रतीक है। जब यह ग्रह आठवें भाव में प्रवेश करता है तो जातक का मन गहराई और रहस्य की ओर आकर्षित हो जाता है। जीवन में परिवर्तन तेज गति से आते हैं और व्यक्ति कई मानसिक परीक्षाओं से गुजरता है। परंतु यही अनुभव उसे अधिक मजबूत, साहसी और आत्मनिर्भर बनाते हैं। यदि सूर्य शुभ ग्रहों से दृष्ट हो तो यह स्थिति व्यक्ति को दीर्घायु, मानसिक परिपक्वता और असाधारण विश्लेषण शक्ति प्रदान करती है।
वैदिक ज्योतिष में सूर्य ग्रह: प्रकाश, प्राण और प्रतिष्ठा का प्रतीक
आठवें भाव में सूर्य का प्रभाव व्यक्ति की सोच में गंभीरता लाता है। जातक को जीवन के रहस्यों को समझने की इच्छा होती है। ज्योतिष, तंत्रविद्या, मनोविज्ञान और शोध कार्यों में विशेष रुचि बढ़ती है। यह ऊर्जा व्यक्ति को शांत भी रखती है और कठिन परिस्थितियों में संयम बनाए रखने में सहायता करती है। बदलाव और चुनौती जीवन का हिस्सा बनते हैं और जातक मानसिक रूप से अधिक परिपक्व होता जाता है।
जब सूर्य शुभ फल दे रहा हो तो आठवें भाव में स्थित होकर वह विरासत, ससुराल पक्ष से लाभ या अचानक धन प्राप्ति के अवसर प्रदान करता है। जीवन के तीसरे दशक के बाद करियर में उन्नति दिखाई देती है। यह स्थिति सरकारी कार्य, शोध संस्थानों योग विज्ञान या प्रशासनिक सेवा में सफलता देती है।
इस भाव में सूर्य व्यक्ति को ध्यान, योग और आत्मविश्लेषण की ओर प्रेरित करता है। जातक जीवन और मृत्यु के रहस्यों को समझने की कोशिश करता ہے। यह यात्रा उसे मानसिक गहराई और शांत ऊर्जा प्रदान करती है। परिवर्तन को स्वाभाविक रूप से स्वीकार करना उसकी प्रकृति बन जाती है।
कठिन परिस्थितियों में भी ऐसे लोग शांत रहते हैं। समस्याओं का समाधान खोजने में वे निपुण होते हैं। संकट के समय इनकी नेतृत्व क्षमता उभर कर सामने आती है जिससे लोग इन पर विश्वास करते हैं। योजना कौशल और गुप्त रणनीति उनकी शक्ति बन जाती है।
सूर्य के तीव्र प्रभाव से व्यक्ति कभी कभी भावनाओं को भीतर ही दबा लेता है। दूसरों पर जल्दी विश्वास नहीं कर पाता। रिश्तों में गहराई लाने में समय लगता है। कई बार मित्रता और संबंधों में दूरी पैदा होती है क्योंकि व्यक्ति हर बात की परख करता रहता है।
अशुभ सूर्य अचानक बुखार, रक्त और त्वचा से जुड़ी समस्याएँ या हड्डियों की कमजोरी दे सकता है। तनाव और मानसिक दबाव भी बढ़ सकता है। कभी कभी आकस्मिक चोट या सर्जरी की संभावना भी दिखाई देती है। इसलिए नियमित जांच और संतुलित जीवनशैली आवश्यक है।
प्रेम संबंधों में स्थिरता की कमी दिखाई देती है। कभी कभी गलतफहमी या निराशा संबंधों को प्रभावित कर सकती है। विवाह के बाद ससुराल पक्ष से लाभ मिलता है परंतु तर्क विवाद भी हो सकते हैं। जीवनसाथी व्यावहारिक और बुद्धिमान होता है लेकिन भावनात्मक रूप से कुछ दूरी महसूस हो सकती है।
यह स्थिति व्यक्ति को शोध, मनोविज्ञान, बीमा, टैक्स, चिकित्सा योग और प्रशासन में सफल बनाती है। तीस वर्ष के बाद करियर स्थिर और फलदायी होने लगता है। कई जातक गुप्त विज्ञान और आध्यात्मिक सेवाओं में भी आगे बढ़ते हैं।
नियमित जांच
योग और प्राणायाम
रचनात्मक गतिविधियों में भाग
संतुलित आहार और पर्याप्त नींद
ॐ घृणि सूर्याय नमः
ॐ ह्रां ह्रीं ह्रौं सः सूर्याय नमः
रविवार को गेहूँ गुड़ तांबा और लाल वस्त्र का दान करें
वृद्ध और रोगियों की सेवा करें
अहंकार से बचें और पारदर्शिता रखें
विश्वासपात्र लोगों से अपने मन की बात साझा करें
आठवें भाव में सूर्य जीवन को गहराई से समझने का अवसर देता है। यह बताता है कि परिवर्तन कभी बाधा नहीं बल्कि विकास का मार्ग है। संबंध टूटें या बनें, करियर में उतार चढ़ाव आएं या स्वास्थ्य की चुनौती हो, सूर्य की ऊर्जा व्यक्ति को भीतर से मजबूत बनाती है। यही ऊर्जा अंधकार के बाद प्रकाश की अनुभूति कराती है।
क्या आठवें भाव में सूर्य हमेशा चुनौती देता है
नहीं शुभ स्थिति में यह गहरी बुद्धिमत्ता और विरासत के योग भी देता है
क्या इस स्थिति वाले लोग आध्यात्मिक होते हैं
हाँ गूढ़ता और आत्मज्ञान की ओर इनका झुकाव स्वाभाविक रूप से बढ़ता है
क्या स्वास्थ्य संबंधी समस्या अधिक रहती है
कभी कभी तनाव और आकस्मिक रोग की संभावना बढ़ जाती है
क्या करियर में सफलता देर से मिलती है
ज्यादातर मामलों में तीस वर्ष के बाद स्थिरता आती है
क्या रिश्तों में दूरी की समस्या होती है
हाँ भावनाओं को व्यक्त करने में कठिनाई के कारण दूरी आ सकती है
सूर्य राशि मेरे बारे में क्या बताती है?
मेरी सूर्य राशि
अनुभव: 19
इनसे पूछें: विवाह, संबंध, करियर
इनके क्लाइंट: छ.ग., म.प्र., दि., ओडि, उ.प्र.
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