By पं. अमिताभ शर्मा
जानिए नवम भाव में सूर्य की उपस्थिति से भाग्य, धर्म, उच्च शिक्षा, आध्यात्मिकता और जीवन में सद्गुणों की ऊर्जा कैसे आती है

नवम भाव को धर्म मार्ग का उजाला माना गया है और इसी प्रकाश में व्यक्ति अपनी दिशा पहचानता है। जब सूर्य इस भाव में आता है, तो यह केवल भाग्य नहीं जगाता बल्कि चरित्र की नींव को भी मजबूत करता है। यहाँ सूर्य का तेज ज्ञान, श्रद्धा, उच्च शिक्षा और नैतिकता को शक्ति देता है। यह स्थिति व्यक्ति को उन अनुभवों तक ले जाती है जिनसे उसकी सोच परिपक्व होती है और जीवन के गहरे प्रश्नों के उत्तर खोजे जाते हैं।
नवम भाव जन्म कुंडली में वह स्थान है जहाँ धर्म, सत्य, गुरु कृपा, उच्च शिक्षा, भाग्य और आध्यात्मिकता के संकेत मिलते हैं। यह पिछले जन्मों के कर्मों का भी सूक्ष्म दर्पण है जो इस जन्म के अवसरों को आकार देता है। जब सूर्य अपनी दिव्य उपस्थिति यहाँ रखता है, तो व्यक्ति के भीतर आदर्शों का संचार होने लगता है और वह जीवन के उद्देश्य को समझना चाहता है।
वैदिक ज्योतिष में सूर्य ग्रह: प्रकाश, प्राण और प्रतिष्ठा का प्रतीक
सूर्य इस भाव में व्यक्ति को धार्मिक रीति की ओर प्रेरित करता है और वह नैतिक मूल्यों का पालन करता है।
यह स्थिति अध्ययन में सफलता देती है और व्यक्ति को उच्च शिक्षा की ओर अग्रसर करती है।
सूर्य की अनुकंपा से भाग्य उन्नत होता है और जीवन में कई अवसर प्राप्त होते हैं।
पिता का मार्गदर्शन और गुरु की कृपा इस स्थिति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
कभी कभी सूर्य का प्रभाव व्यक्ति को अपने विचारों का अत्यधिक आग्रह करने वाला बना देता है।
सूर्य अशुभ होने पर पिता से दूरी या विचारों का मतभेद संभव है।
यह स्थिति कभी कभी शारीरिक और मानसिक तनाव ला सकती है।
नवम भाव में सूर्य व्यक्ति को ऐसे क्षेत्रों में सफलता देता है जहाँ ज्ञान और संवाद की आवश्यकता होती है।
| क्षेत्र | विवरण |
|---|---|
| शिक्षण | गहरी समझ और मार्गदर्शन क्षमता |
| कानून | सत्य की खोज और तार्किक सोच |
| धर्म प्रचार | समाज को दिशा देने की क्षमता |
| विदेश संबंध | वैश्विक दृष्टिकोण |
नवम भाव में सूर्य व्यक्ति को यह सिखाता है कि ज्ञान और धर्म की राह पर चलना ही जीवन की सच्ची उपलब्धि है। यह स्थिति बताती है कि आत्मविश्वास तभी प्रभावी होता है जब उसमें विनम्रता की चमक भी हो। व्यक्ति जब सत्य और नैतिक आचरण से जुड़ा रहता है, तो भाग्य उसका साथ देने लगता है।
क्या नवम भाव में सूर्य हमेशा भाग्य बढ़ाता है
भाग्य में वृद्धि के योग बनते हैं पर कर्म और विवेक जरूरी है
क्या इस स्थिति से उच्च शिक्षा में सफलता मिलती है
हाँ शोध, दर्शन और विदेश शिक्षा में अच्छे परिणाम मिलते हैं
क्या पिता से मतभेद होना सामान्य है
कभी विचारों का टकराव हो सकता है पर उपाय और सम्मान से संतुलन आता है
क्या स्वास्थ्य प्रभावित हो सकता है
हाँ आँखों और हृदय से जुड़ी समस्याएँ उभर सकती हैं
सूर्य की कृपा पाने का सरल उपाय क्या है
प्रतिदिन ॐ घृणि सूर्याय नमः का जाप और रविवार को दान करना
सूर्य राशि मेरे बारे में क्या बताती है?
मेरी सूर्य राशि
अनुभव: 32
इनसे पूछें: विवाह, करियर, व्यापार, स्वास्थ्य
इनके क्लाइंट: छ.ग., उ.प्र., म.प्र., दि.
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