By पं. सुव्रत शर्मा
जानिए तृतीय भाव में सूर्य के प्रभाव से भाषण, साहस, बुद्धि और रिश्तों में कैसे आता है स्पष्टता और ऊर्जा

वैदिक ज्योतिष में सूर्य आत्मा, ऊर्जा, नेतृत्व, आत्मसम्मान और जीवन उद्देश्य का प्रतीक है। जब सूर्य जन्म कुंडली के तीसरे भाव में स्थित होता है, तो जातक के साहस, संचार, भाई बहनों से संबंध, प्रयास, पराक्रम और मानसिक दृढ़ता पर गहरा प्रभाव डालता है। तीसरा भाव अभिव्यक्ति, लघु यात्राओं, कौशल और प्रयासों से मिलने वाली सफलता का प्रतिनिधित्व करता है। सूर्य का यहां होना व्यक्ति के भीतर आत्मबल, तेजस्विता और सक्रियता का संचार करता है।
सूर्य अग्नि तत्व का ग्रह है जो आत्मविश्वास, दिशा, स्पष्टता और शक्ति देता है। तीसरा भाव उपचय भाव है जो समय के साथ बढ़ते परिणाम देता है। इस भाव में सूर्य आने पर व्यक्ति मुखर, साहसी, स्वतंत्र विचार वाला और तेज बुद्धि वाला बनता है।
वैदिक ज्योतिष में सूर्य ग्रह: प्रकाश, प्राण और प्रतिष्ठा का प्रतीक
सूर्य जातक को तार्किक, स्पष्ट और प्रेरक वक्ता बनाता है। ऐसे लोग अपने शब्दों से दूसरों पर गहरा प्रभाव छोड़ते हैं।
उदाहरण: राजनीतिज्ञ, वक्ता, शिक्षक, पत्रकार, वकील।
निडर स्वभाव, जोखिम लेने की क्षमता और नई राह बनाने का साहस। ये लोग कठिन परिस्थितियों में भी स्थिर रहते हैं और हार नहीं मानते।
नई चीजें सीखने की ललक, विश्लेषण क्षमता और शोधप्रियता। ऐसे लोग तकनीक, लेखन, शिक्षा और अनुसंधान में उत्कृष्टता प्राप्त कर सकते हैं।
सूर्य भाई बहनों के साथ संबंधों में गर्मजोशी लाता है। जातक उनके जीवन में प्रेरक भूमिका निभाता है।
लघु यात्राएँ, अध्ययन यात्राएँ और तीर्थ यात्राएँ जीवन में समृद्धि लाती हैं। विभिन्न संस्कृतियों को समझने की जिज्ञासा बढ़ती है।
अपनी बात को सही मानना, दूसरों की राय पर ध्यान न देना और वाणी में कठोरता संबंधों को प्रभावित कर सकती है।
जल्द परिणाम पाने की चाह में गलत निर्णय लेने की संभावना। मानसिक दबाव बढ़ सकता है।
सूर्य की अष्टम दृष्टि कभी कभी तनाव, प्रतिस्पर्धा या वाद विवाद का कारण बन सकती है।
गले, आंखों, हृदय, गर्दन या नसों से संबंधित समस्याएं हो सकती हैं। मानसिक सक्रियता अधिक होने से अनिद्रा बढ़ सकती है।
तृतीय भाव में सूर्य जातक को स्पष्ट बोलने, निर्भीक होने और नई दिशाओं में आगे बढ़ने की शक्ति देता है। यह सिखाता है कि साहस तभी सार्थक है जब उसमें संयम और विनम्रता हो। सम्मान शब्दों से मिलता है, लेकिन दिल विनम्रता से जीता जाता है।
तृतीय भाव में सूर्य व्यक्ति को वाक्पटु, साहसी और जिज्ञासु बनाता है। यदि अहंकार और अधीरता पर नियंत्रण रखा जाए, तो यह स्थिति जीवन में बड़ी उपलब्धियाँ दिलाती है। सूर्य की ऊर्जा को संतुलित करके व्यक्ति अपने प्रयासों को सफलता तक ले जा सकता है।
1. क्या तृतीय भाव में सूर्य संचार को मजबूत बनाता है?
हाँ, यह वाणी को प्रभावी और प्रेरक बनाता है।
2. क्या यह भाई बहनों से संबंध प्रभावित करता है?
हाँ, सामान्यतः सहयोग देता है, पर कभी कभी मतभेद भी करा सकता है।
3. क्या यह करियर में वृद्धि देता है?
हाँ, मीडिया, शिक्षा, राजनीति और तकनीकी क्षेत्रों में सफलता देता है।
4. नकारात्मक प्रभाव कैसे कम करें?
वाणी में नम्रता, ध्यान, योग और सूर्य मंत्र का जाप बहुत लाभ देता है।
5. क्या विवाह में देरी हो सकती है?
हाँ, महत्वाकांक्षा और लक्ष्य केंद्रित जीवन के कारण विवाह देर से हो सकता है।
सूर्य राशि मेरे बारे में क्या बताती है?
मेरी सूर्य राशि
अनुभव: 27
इनसे पूछें: विवाह, करियर, संपत्ति
इनके क्लाइंट: छ.ग., म.प्र., दि., ओडि
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