By पं. सुव्रत शर्मा
जानिए अष्टकूट के आठों गुणों का वास्तविक अर्थ, विवाह योग्यता और गुण मिलान के महत्व की गहराई

वैदिक विवाह में सबसे पहला और महत्वपूर्ण चरण है—कुंडली का अष्टकूट मिलान। इसका उद्देश्य केवल यह जानना नहीं कि विवाह होगा या नहीं, बल्कि यह समझना है कि वर और कन्या की मानसिक, भावनात्मक और व्यवहारिक ऊर्जा एक-दूसरे के साथ सामंजस्य बैठा पाएगी या नहीं। अष्टकूट मिलान भविष्य के वैवाहिक जीवन का एक समग्र चित्र प्रस्तुत करता है।
| गुण | अंक | प्रभाव |
|---|---|---|
| वर्ण | 1 | संस्कार और मानसिक मेल |
| वश्य | 2 | भावनात्मक संतुलन |
| तारा | 3 | भाग्य और स्वास्थ्य |
| योनि | 4 | अंतरंगता और आकर्षण |
| ग्रहमैत्री | 5 | मित्रता और संवाद |
| गण | 6 | स्वभावगत संगति |
| भकूट | 7 | स्थिरता और संतान |
| नाड़ी | 8 | स्वास्थ्य और वंशवृद्धि |
| कुल गुण | श्रेणी | परिणाम |
|---|---|---|
| 0–17 | कमजोर मिलान | विवाह अनुशंसित नहीं |
| 18–24 | औसत मिलान | प्रयास और समझ आवश्यक |
| 25–32 | अच्छा मिलान | अनुकूल और स्थिर जीवन |
| 33–36 | उत्तम मिलान | अत्यंत शुभ और संतुलित दांपत्य |
हाँ, लेकिन शास्त्रों में इसे दिशा निर्देश के रूप में देखा गया है। दोष मिलने पर उपाय किए जा सकते हैं। सही मिलान रिश्ते की नींव को मजबूत करता है।
1. क्या कम गुण मिलने पर विवाह असंभव हो जाता है?
नहीं। उपायों और सही मार्गदर्शन से विवाह संभव है।
2. क्या नाड़ी दोष सबसे गंभीर माना जाता है?
हाँ, लेकिन कई अपवाद और शमन उपाय उपलब्ध हैं।
3. क्या योनि दोष दांपत्य जीवन को प्रभावित करता है?
हाँ, यह अंतरंगता और स्वभावगत टकराव बढ़ा सकता है।
4. क्या उच्च अंक ही अच्छे विवाह की गारंटी देते हैं?
नहीं। प्रेम, समझ और संवाद अधिक महत्वपूर्ण हैं।
5. क्या सिर्फ नाम अक्षर से मिलान विश्वसनीय होता है?
जब जन्म विवरण उपलब्ध न हों, तब यह वैध विकल्प है।
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