By पं. सुव्रत शर्मा
संतान रक्षा की माता अहोई पूजा, अनंतसूत्र कथा, क्षेत्रीय परंपराएं और ज्योतिषीय लाभ

अहोई अष्टमी व्रत एक दिव्य पूजन-उपवास है जिसे माताएँ अपने संतान के दीर्घायु और शुभ-समृद्धि के लिए करती हैं। यह व्रत कार्तिक कृष्ण पक्ष अष्टमी तिथि को मनाया जाता है। 2025 में अहोई अष्टमी 13 अक्टूबर को है।
अष्टमी तिथि 13 अक्टूबर दोपहर 12:24 बजे प्रकट होगी और 14 अक्टूबर सुबह 11:09 बजे समाप्त होगी। पूजा मुहूर्त शाम 05:53 से 07:08 बजे तक रहेगा। नक्षत्र पूजा समय लगभग 06:17 बजे होगा। चंद्र उदय समय 11:20 बजे रहेगा।
पौराणिक मान्यता है कि एक बलहिन रानी रानी अहोई ने अपने छह पुत्रों के रक्षक रूप में अहोई माता की पूजा की थी। एक बार वे जंगल में भ्रमण के दौरान सर्पदंश का शिकार हो गए थे। माता अहोई ने संकल्पपूर्वक व्रत रखा और देवदूतों के माध्यम से अपने पुत्रों को जीवनदान प्राप्त कराया। इस घटना से यह व्रत संतान रक्षा का प्रतीक बन गया।
एक अन्य कथा में माता अहोई ने अपने परिवार को विभीषण के राज्य में निरंतर सुख-समृद्धि का वरदान पाने के लिए व्रत रखा। उस व्रत से विभीषण को आत्मिक शांति और राज्य की स्थिरता प्राप्त हुई।
| सामग्री | उद्देश्य |
|---|---|
| अहोई माता की प्रतिमा या चित्र | पूजा का केंद्र |
| जल से भरा कलश | पवित्र अभिषेक |
| पुष्प और अक्षत | देवष्टुति एवं अर्पण |
| धूप-दीप | सुगंध और प्रकाश |
| रोली, चन्दन, हल्दी | तिलक और श्रृंगार |
| गाय का दूध तथा पंचामृत | अभिषेक हेतु |
| सूखा आटा (चौमिन) | प्रसाद तथा स्थायित्व का प्रतीक |
| सजाया हुआ करवा | व्रत की परिणति |
| लाल चुनरी, चूड़ी, सिंदूर | पारंपरिक आभूषण और सजावट |
व्रत पारण चांद या तारों का दर्शन करने के उपरांत ही करना चाहिए, जिससे माता आशिर्वाद की रक्षा बनी रहती है।
अहोई अष्टमी के दिन चंद्रमा तुलनात्मक रूप से शुभ स्थिति में होता है। यह दिन संतान से संबंधित ग्रहों के लिए अनुकूल है। व्रत से मन में सन्तुलन आता है और परिवार में सौहार्द बढ़ता है।
| ग्रह | प्रभाव |
|---|---|
| चंद्रमा | मातृत्व और भावनात्मक सुरक्षा |
| बृहस्पति | संतान के विकास में मार्गदर्शन |
| मंगल | पारिवारिक शक्ति और सम्मान |
प्रश्न 1: अहोई अष्टमी व्रत किनके लिए खास है?
उत्तरा: यह माताओं द्वारा संतान की रक्षा और दीर्घायु के लिए विशेष पूजन व्रत है।
प्रश्न 2: क्या निर्जल व्रत करना चाहिए?
उत्तरा: निर्जल व्रत फलदायी माना जाता है लेकिन फलाहार भी स्वीकार्य है।
प्रश्न 3: कथा का पाठ कब करें?
उत्तरा: शाम मे तारा दर्शन के उपरांत पूजा के बाद करना शुभ होता है।
प्रश्न 4: करवा पर क्या सजावट रखनी चाहिए?
उत्तरा: लाल चुनरी, चूड़ी और पुष्पों से सजाना पारंपरिक और शुभ होता है।
प्रश्न 5: प्रसाद में क्या देता है?
उत्तरा: सूखा आटा, पंचामृत, फल और मिठाई प्रसाद स्वरूप वितरित होते हैं।

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