विश्वकर्मा पूजा 2025: दिव्य शिल्पकार और श्रम के पर्व का महत्व

By पं. संजीव शर्मा

भगवान विश्वकर्मा की पूजा, संक्रांति समय, इतिहास, महत्व और अनुष्ठान की पूरी जानकारी

विश्वकर्मा पूजा 2025 की तिथि, महत्व और पूजा विधि

भारतीय संस्कृति में विश्वकर्मा भगवान को देवशिल्पी और दिव्य वास्तुकार माना जाता है। उन्हें ब्रह्मांड का नियोजक और सृष्टि के उपकरणों का निर्माता कहा गया है। द्वारका नगरी, देवताओं के अद्भुत अस्त्र-शस्त्र, भवन और यंत्र सब उनकी रचना माने जाते हैं।

हर वर्ष यह पर्व भगवान विश्वकर्मा की जयंती पर मनाया जाता है। इस दिन कारीगर, अभियंता, मजदूर और तकनीकी क्षेत्र से जुड़े लोग अपने औजारों और मशीनों की पूजा करके भगवान विश्वकर्मा का स्मरण करते हैं।

विश्वकर्मा पूजा 2025 की तारीख और संक्रांति का समय

वर्ष 2025 में विश्वकर्मा पूजा बुधवार, 17 सितम्बर 2025 को मनाई जाएगी। इस दिन कन्या संक्रांति या भद्रा संक्रांति भी है। पंचांग के अनुसार संक्रांति का समय प्रातः 01:55 बजे आरंभ होगा।

इस दिन कई राज्यों में अवकाश भी रहेगा और यह पर्व पूर्वी भारत, उत्तर भारत और कुछ उत्तरी राज्यों में विशेष श्रद्धा से मनाया जाता है।

तालिका: विश्वकर्मा पूजा 2025 की जानकारी

तिथिवारविशेष संयोगसमय
17 सितम्बर 2025बुधवारकन्या संक्रांति / भद्रा संक्रांति01:55 AM से प्रारंभ

इतिहास और वैदिक महत्व

ऋग्वेद सहित कई ग्रंथों में भगवान विश्वकर्मा का वर्णन मिलता है। वे देवताओं और मनुष्यों के लिए यंत्र, नगर, महल और विभिन्न संरचनाओं के रूपकार कहे जाते हैं।

इतिहास में विश्वकर्मा जयंती का उद्देश्य केवल एक देवता के रूप में पूजा करना नहीं बल्कि श्रम, कौशल और सृजनशीलता का सम्मान करना है। कारिगरों, अभियंताओं और शिल्पियों द्वारा सृजन को समाज में सर्वोच्च स्थान दिया गया है।

विश्वकर्मा पूजा का महत्व

  • यह दिन औद्योगिक और तकनीकी प्रगति के प्रति सम्मान को दर्शाता है।
  • कारखानों, कार्यशालाओं और दफ्तरों में पूजा और अवकाश रखा जाता है।
  • मशीनें और औजार सजाए जाते हैं और उनकी पूजा की जाती है।
  • इस दिन नए प्रोजेक्ट और मशीनरी का उद्घाटन भी शुभ माना जाता है।
  • उद्योग क्षेत्र के लोग सुरक्षा और सफलता के लिए प्रार्थना करते हैं।

तालिका: महत्व का सारांश

पक्षमहत्व
धार्मिकदेव शिल्पकार की पूजा
सामाजिकश्रम और कौशल का सम्मान
आर्थिकव्यापार और उद्योग की वृद्धि
आध्यात्मिककर्म और सृजन के प्रति समर्पण

पूजा विधि और अनुष्ठान

  • प्रातः स्नान और शुद्धिकरण करके पूजा आरंभ की जाती है।
  • स्थान और कार्यस्थल को साफ-सुथरा किया जाता है।
  • भगवान विश्वकर्मा की प्रतिमा या चित्र स्थापित किया जाता है।
  • औजारों, मशीनों और उपकरणों को सजाकर पूजा की जाती है।
  • फूल, धूप, दीपक, अक्षत और मिठाई अर्पित की जाती है।
  • हवन और सामूहिक पूजा का आयोजन होता है।
  • श्रद्धालु प्रार्थना करते हैं कि उनके कार्यक्षेत्र में सुरक्षा, समृद्धि और नवाचार बना रहे।

पूजा सामग्री (समग्री सूची)

सामग्रीमहत्व
भगवान विश्वकर्मा की प्रतिमाउपासना का केंद्र
पूजा थालीसामग्री संयोजन के लिए
चावल और अक्षतपवित्र अर्पण
फूल और मालासजावट और भक्ति
चंदन और धूपसुगंध और शुद्धि
नारियलविघ्न विनाश का प्रतीक
दीपक और कपूरज्योति और आरती
फल और मिठाईप्रसाद
औजार और उपकरणसम्मान और आशीर्वाद हेतु
गंगाजल और पंचामृतअभिषेक और शुद्धिकरण

विश्वकर्मा मंत्र और आरती

मंत्र:
ॐ विश्वकर्माय नमः
ॐ नित्यकर्माय नमः
ॐ अर्जुनसखाय नमः
ॐ विश्वकर्माय नमोस्तुते

आरती:

जय श्री विश्वकर्मा प्रभु, जय श्री विश्वकर्मा।
सकल सृष्टि के करता, रक्षक स्तुति धर्मा॥

... (शेष पदों का गायन)

इस आरती का पाठ करने से श्रम की शक्ति और कौशल में उन्नति होती है।

विभिन्न राज्यों में विश्वकर्मा पूजा

  • पश्चिम बंगाल और त्रिपुरा: बिस्वकर्मा पूजा के नाम से धूमधाम से मनाते हैं।
  • ओडिशा और झारखंड: कार्यस्थल सजाए जाते हैं और पतंग उड़ाना भी परंपरा है।
  • पंजाब, हरियाणा, राजस्थान: फैक्ट्रियों और वर्कशॉप्स में पूजा होती है और अवकाश घोषित किया जाता है।
  • बिहार और उत्तर भारत: इसे दीपावली के बाद मनाया जाता है और फसल से जुड़ा हुआ माना जाता है।

आध्यात्मिक संदेश

विश्वकर्मा पूजा केवल धार्मिक नहीं बल्कि सामाजिक और व्यावसायिक पर्व भी है। यह हमें यह स्मरण कराता है कि श्रम और कौशल ही समाज का वास्तविक आधार हैं। समर्पण, सृजनशीलता और परिश्रम की भावना से ही मानव जीवन और संस्कृति का विकास होता है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

प्रश्न 1: विश्वकर्मा पूजा 2025 कब है?
उत्तर: 17 सितम्बर 2025, बुधवार को।

प्रश्न 2: इस दिन कौन सा संयोग रहेगा?
उत्तर: कन्या संक्रांति या भद्रा संक्रांति और संक्रांति समय 01:55 AM से रहेगा।

प्रश्न 3: विश्वकर्मा पूजा में क्या पूजते हैं?
उत्तर: भगवान विश्वकर्मा की प्रतिमा, औजार और मशीनरी।

प्रश्न 4: इसे किन राज्यों में प्रमुखता से मनाया जाता है?
उत्तर: पश्चिम बंगाल, ओडिशा, झारखंड, त्रिपुरा, बिहार, पंजाब, राजस्थान और हरियाणा।

प्रश्न 5: पूजा सामग्री में क्या-क्या रखा जाता है?
उत्तर: प्रतिमा या चित्र, फूल, दीपक, नारियल, गंगाजल, औजार और मिठाई।

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पं. संजीव शर्मा

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