By पं. संजीव शर्मा
जानिए रथ यात्रा की तिथि, पौराणिक कथा, रथ निर्माण की प्रक्रिया और ज्योतिषीय महत्व

जगन्नाथ रथ यात्रा भारत के सबसे प्राचीन और दिव्य पर्वों में से एक है, जो हर वर्ष पुरी में आषाढ़ शुक्ल द्वितीया को आयोजित होती है। यह केवल धार्मिक उत्सव नहीं, बल्कि भक्ति, समर्पण, सांस्कृतिक एकता और मोक्ष के मार्ग का संकेत है। 2025 में यह यात्रा 27 जून से 5 जुलाई तक चलेगी और लाखों श्रद्धालु इसमें भाग लेंगे।
वैदिक ज्योतिष में नक्षत्रों का स्वभाव: एक गहन अध्ययन
पुरी का श्री जगन्नाथ धाम चार धामों में से एक है, जिसे धरती का वैकुंठ कहा जाता है।
रथ यात्रा में भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा तीन दिव्य रथों पर विराजकर मुख्य मंदिर से गुंडिचा मंदिर तक जाते हैं। इसे आत्मा की मोक्ष यात्रा का प्रतीक माना गया है।
रथ को छूने या खींचने से पापों का नाश, शांति, समृद्धि और मोक्ष का लाभ प्राप्त होता है।
एक कथा के अनुसार, श्रीकृष्ण की बहन सुभद्रा ने पुरी का दर्शन करना चाहा।
जगन्नाथ और बलभद्र ने उन्हें रथ पर बैठाकर नगर-दर्शन कराया।
इसी घटना की स्मृति में रथ यात्रा की परंपरा उत्पन्न हुई।
एक अन्य कथा बताती है कि राजा इन्द्रद्युम्न को समुद्र किनारे दिव्य काष्ठ मिला।
भगवान विश्वकर्मा ने उसी काष्ठ से जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा की मूर्तियाँ निर्मित कीं।
निर्माण अधूरा रहने पर भी आकाशवाणी हुई कि भगवान इसी रूप में पूजे जाना चाहते हैं।
तभी से रथ यात्रा की परंपरा निरंतर चल रही है।
रथ निर्माण: हर वर्ष नए काष्ठ से रथ बनते हैं।
नंदीघोष (जगन्नाथ) – 16 पहिए
तालध्वज (बलभद्र) – 14 पहिए
दर्पदलना (सुभद्रा) – 12 पहिए
अनासरा काल: स्नान पूर्णिमा के बाद भगवान 15 दिन तक दर्शन नहीं देते।
छेरा पहरा: पुरी के महाराज स्वर्ण झाड़ू से रथ की सफाई करते हैं, जो सेवा और समता का प्रतीक है।
रथ खींचना: लाखों भक्त रस्सियों से रथ खींचते हैं। मान्यता है कि इससे जन्म-जन्मांतर के पाप मिटते हैं।
गुंडिचा यात्रा: भगवान कुछ दिन गुंडिचा मंदिर में विश्राम करते हैं, फिर बहुड़ा यात्रा होती है।
महाप्रसाद: खिचड़ी रूपी महाप्रसाद ग्रहण करना अत्यंत पुण्यकारी माना जाता है।
जगन्नाथ रथ यात्रा में भगवान स्वयं भक्तों के बीच आते हैं।
यह यात्रा बिना किसी भेदभाव के सभी को समान दृष्टि से जोड़ती है।
भक्ति, सेवा, समर्पण और सामाजिक एकता का यह पर्व मानवता को एक सूत्र में पिरोता है।
रथ यात्रा जीवन की उस यात्रा का संकेत है जहाँ आत्मा अपने मूल स्थान की ओर लौटती है।
भक्ति, निष्ठा और सेवा से जीवन पवित्र बनता है और मन में शांति का प्रकाश स्थापित होता है।
जगन्नाथ रथ यात्रा में रथ खींचने का क्या महत्व है?
रथ खींचना पापों का शोधन और शुभ फल प्राप्ति का प्रतीक माना जाता है।
रथ यात्रा कितने दिनों तक चलती है?
लगभग नौ दिनों तक, मुख्य यात्रा से लेकर बहुड़ा यात्रा तक।
क्या घर पर रथ यात्रा का पूजन किया जा सकता है?
हाँ, जो लोग पुरी नहीं जा पाते वे घर पर पूजा, मंत्र जाप और प्रसाद वितरण कर सकते हैं।
छेरा पहरा का आध्यात्मिक अर्थ क्या है?
यह दर्शाता है कि भगवान के समक्ष राजा और साधारण भक्त सभी समान हैं।
रथ यात्रा से कौन-कौन से ग्रह दोष शांत होते हैं?
चंद्र दोष, पितृ दोष और राहु-केतु से संबंधित बाधाएँ कम मानी जाती हैं।
पाएं अपनी सटीक कुंडली
कुंडली बनाएं
अनुभव: 15
इनसे पूछें: पारिवारिक मामले, आध्यात्मिकता और कर्म
इनके क्लाइंट: दि., उ.प्र., म.हा.
इस लेख को परिवार और मित्रों के साथ साझा करें