पितृ पक्ष 2025: तिथि, श्राद्ध विधि और ज्योतिषीय महत्व

By पं. संजीव शर्मा

सोलहदिवसीय श्राद्ध, प्रत्येक तिथि का महत्व, शुभ पूजा, दान और श्रेष्ठ पारिवारिक परंपरा

पितृ पक्ष 2025: तिथि-सूची, सम्पूर्ण श्राद्ध विधि व लाभ

पितृ पक्ष भारतीय जीवन का वह सोलहदिवसीय काल है, जब घर-परिवार पूर्वजों की स्मृति में एकजुट होते हैं। हर साल भाद्रपद पूर्णिमा से लेकर सर्व पितृ अमावस्या (महालया अमावस्या) तक, यह अति पावन पर्व पूरे राष्ट्र में श्रद्धा और पारिवारिक एकता के साथ मनाया जाता है। सनातन धर्म में इसे 'श्राद्ध पक्ष', 'श्राद्ध पितृपक्ष' या 'महालय' भी कहते हैं। युगों से यह काल आत्मीय कृतज्ञता, श्राद्ध, तर्पण, पिंडदान और विविध दान संस्कारों के लिए सर्वोच्च माना गया है।

पितृ पक्ष 2025: तिथि सूची, तिथि की शुरुआत और समापन

इस वर्ष पितृ पक्ष रविवार, 7 सितंबर 2025 को भाद्रपद पूर्णिमा से आरंभ होगा और रविवार, 21 सितंबर 2025 को सर्वपितृ अमावस्या के साथ समाप्त होगा। हर दिन श्राद्ध की अलग तिथि है, जिससे प्रत्येक परिवार अपने पितरों की पावन स्मृति और अनुसंधान कर सके।

तिथिश्राद्धतिथि आरंभतिथि समापन
7 सितंबरपूर्णिमा श्राद्ध01:41 AM11:38 PM
8 सितंबरप्रतिपदा श्राद्ध11:38 PM (7 Sep)09:11 PM
9 सितंबरद्वितीया श्राद्ध09:11 PM (8 Sep)06:28 PM
10 सितंबरतृतीया श्राद्ध06:28 PM (9 Sep)03:37 PM
11 सितंबरचतुर्थी श्राद्ध03:37 PM (10 Sep)12:45 PM
12 सितंबरपंचमी श्राद्ध12:45 PM (11 Sep)09:58 AM
13 सितंबरषष्ठी श्राद्ध09:58 AM (12 Sep)07:23 AM
14 सितंबरसप्तमी श्राद्ध07:23 AM (13 Sep)05:04 AM
15 सितंबरअष्टमी श्राद्ध05:04 AM (14 Sep)03:06 AM
16 सितंबरनवमी श्राद्ध03:06 AM (15 Sep)01:31 AM
17 सितंबरदशमी श्राद्ध01:31 AM (16 Sep)12:21 AM
18 सितंबरएकादशी श्राद्ध12:21 AM (17 Sep)11:39 PM
19 सितंबरद्वादशी श्राद्ध11:39 PM (17 Sep)11:24 PM
20 सितंबरत्रयोदशी श्राद्ध11:24 PM (18 Sep)11:36 PM (19 Sep)
21 सितंबरचतुर्दशी श्राद्ध11:36 PM (19 Sep)12:16 AM (21 Sep)
21 सितंबरसर्वपितृ अमावस्या12:16 AM01:23 AM (22 Sep)

पितृ पक्ष क्यों मनाया जाता है?

हिंदू धर्म में मान्यता है कि पितृ पक्ष में पूर्वजों की आत्माएँ पृथ्वी पर परिजनों के पास आती हैं। श्रद्धापूर्वक किया गया श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान पूर्वजों को तृप्ति देता है और परिवार पर उनका आशीर्वाद बना रहता है। इस अवधि में सभी सुख-सुविधाओं, नई वस्तुओं की खरीदारी, विवाह आदि कार्यों की मनाही की जाती है, ताकि पितरों के प्रति पूर्ण केंद्रित श्रद्धा रखी जा सके।

पितृ पक्ष में किए जाने वाले मुख्य अनुष्ठान

  • श्राद्ध: यह विधि प्रत्येक दिवंगत पूर्वज के नाम और तिथि के अनुसार की जाती है। इसमें विवेक, गायत्री मंत्र व ब्राह्मण को भोजन देना सम्मिलित है।
  • तर्पण: पितरों की आत्मिक तृप्ति हेतु जल, तिल और कुशा घास के साथ तर्पण किया जाता है।
  • पिंडदान: चावल, तिल, शहद और अन्य समाग्री से बने पिंड के माध्यम से आत्मा की तृप्ति, जातिगत और कुलगत दोष दूर करना।
  • दान: वस्त्र, जूते, छाता, अन्न, द्रव्य, जल पात्र, दक्षिणा - जो दिवंगतों को प्रिय रहा हो।
  • विशेष पकवान: दिवंगत की पसंदीदा वस्तुएँ, तिल, दूध, घी, खीर, पूरी आदि।

पितृ पक्ष का महत्व: मोक्ष, आशीर्वाद व कुल परंपरा

शास्त्रों के अनुसार पितर्पक्ष वह शुद्ध काल है, जब मृतात्माओं को मोक्ष मार्ग, शांति और उच्च गति मिलती है। पितृपक्ष में श्राद्ध करने से:

  • पितृ ऋण कम होता है और पुण्यफल की प्राप्ति होती है।
  • घर में पंचबलि (कौवे, गाय, कुत्ता, चींटी, ब्राह्मण) को भोजन अर्पण करने से प्राकृतिक संतुलन और ऊर्जा में वृद्धि होती है।
  • कुल वंश का दैविक रक्षण होता है और संतान, स्वास्थ्य, संबंधों में समरसता आती है।
  • कुटुम्ब व व्यवसाय में बाधाएँ दूर होती हैं और सफलता बढ़ती है।

श्राद्ध और तर्पण की संक्षिप्त विधि

  • शुभ तिथि पर शुद्ध मन से, संध्या या प्रातःकाल, दक्षिण की ओर मुख करके तर्पण और श्राद्ध करें।
  • तिथि के अनुसार संबंधित दिवंगत परिजन का नाम और गोत्र स्मरण करें।
  • पूर्वजों को याद कर पिंड अर्पित करें, तिल और चावल के साथ।
  • तर्पण हेतु शुद्ध जल, कुशा, चमेली के पुष्प, तिल और मंत्रों का जाप करें।
  • ब्राह्मण/जरूरतमंद को भोजन और वस्त्र दें।

FAQs: अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

प्रश्न 1: पितृ पक्ष में शादी, नया घर या वाहन लेना क्यों वर्जित है?
उत्तरा: यह समय आत्मीय स्मृति और त्याग का है, स्वार्थी मांगलिक कार्यों से बचना चाहिए।

प्रश्न 2: श्राद्ध की तिथि कैसे तय करें?
उत्तरा: सामान्यतः मृतक के निधन की तिथि अथवा विशेष अमावस्या-पूर्णिमा देखी जाती है, गोत्राचार्य, पंडित या पंचांग से पूछें।

प्रश्न 3: क्या महिलाएं श्राद्ध, तर्पण या दान कर सकती हैं?
उत्तरा: हाँ, शास्त्रों के अनुसार विशेष परिस्थिति में महिलाएं मातृकुल व पित्रकुल के लिए कर सकती हैं।

प्रश्न 4: पितृ पक्ष के दौरान मुख्य पकवान कौन से होते हैं?
उत्तरा: खीर, पूरी, तिल, चना, मौसमी फल, दूध, शहद और दिवंगत की प्रिय वस्तुएँ।

प्रश्न 5: सर्वपितृ अमावस्या क्या है?
उत्तरा: अंतिम तिथि, जिनका श्राद्ध तिथि ज्ञात न हो, उनके लिए सर्वपितृ तर्पण, समर्पण और दान का दिन।

पितर स्मृति-संस्कार का पाठ

पितृ पक्ष केवल शोक का नहीं, जीवन-ज्योति, आभार और सांस्कृतिक चेतना का उत्सव है। भारत के प्रत्येक क्षेत्र, जाति और घर में यह पर्व परिवार को सशक्त, रिश्तों को प्रगाढ़ और वंशानुक्रम को जीवंत बनाए रखने का सबसे पवित्र अवसर है।

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लेखक

पं. संजीव शर्मा

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