शरद पूर्णिमा 2025: तिथि और पूजन समय

By पं. नरेंद्र शर्मा

कोजागरी व्रत, खीर परंपरा और लक्ष्मी पूजन का महत्व

शरद पूर्णिमा 2025 तिथि और महत्व

शरद पूर्णिमा, जिसे आश्विन पूर्णिमा या कोजागरी पूर्णिमा भी कहा जाता है, हिन्दू पंचांग और सनातन संस्कृति में अत्यंत विशेष और पूजनीय पर्व है। यह पर्व केवल एक खगोलीय घटना नहीं बल्कि धार्मिक, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक दृष्टि से महत्ता रखने वाला दिन है। परंपरा के अनुसार माना जाता है कि इस रात्रि चंद्रमा सम्पूर्ण सोलह कलाओं से युक्त होता है। उसकी किरणें अमृतमयी और जीवन दायिनी मानी जाती हैं। इस दिन का आगमन शरद ऋतु की शुरुआत को दर्शाता है और इसे विशेष रूप से स्वास्थ्य, धन, समृद्धि और आध्यात्मिक उन्नति के प्रतीक पर्व के रूप में देखा जाता है।

वर्ष 2025 में शरद पूर्णिमा सोमवार, 6 अक्टूबर 2025 को पड़ रही है। पंचांग गणना के अनुसार पूर्णिमा तिथि 6 अक्टूबर दोपहर 12:23 बजे प्रारंभ होगी और 7 अक्टूबर प्रातः 9:16 बजे तक विद्यमान रहेगी। इस दिन का चंद्रोदय सायं 5:33 बजे होने का अनुमान है।

शरद पूर्णिमा 2025 के शुभ मुहूर्त

  • ब्रह्म मुहूर्त (4:39 AM से 5:28 AM):
    इस समय किए गए कार्य विशेषत: स्नान, जप और ध्यान आत्मा और शरीर की शुद्धि के लिए सर्वोत्तम माने जाते हैं। इस कालखंड में स्नान करना और पवित्र नदियों में डुबकी लगाना पुण्यदायी माना जाता है।
  • उन्नति मुहूर्त (10:41 AM से 12:09 PM):
    यह समय विशेष रूप से कल्याणकारी कार्यों के लिए आदर्श है। इस अवधि में पूजन एवं दान करने से जीवन में उन्नति, सफलता और सौभाग्य के नए द्वार खुलते हैं।
  • अमृत मुहूर्त (12:09 PM से 1:37 PM):
    यह काल अत्यंत शुभ और फलप्रद है। इस समय दान, स्नान और पूजन करने से पुण्यफल अनन्त गुणा बढ़ जाता है और साधक के जीवन में अमृततुल्य शांति और आशीर्वाद का संचार होता है।

धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व

  • चंद्रमा का विषेश प्रभाव: शरद पूर्णिमा की रात्रि को चंद्रमा पृथ्वी के सबसे समीप माना जाता है। उसकी किरणों में औषधीय और रोगहर गुण होते हैं। इस दिन की चांदनी भौतिक शरीर पर सकारात्मक प्रभाव डालती है और मनुष्य की आत्मा को ऊर्जावान बनाती है।
  • अमृतमयी किरणों का संचार: इस दिन कहा जाता है कि चंद्रकिरणें अमृत वर्षा की भांति धरा पर बरसती हैं। यह जीवन में दीर्घायु और रोगनाश का वरदान देती हैं।
  • विशेष पूजन: इस दिन भगवान विष्णु, माता लक्ष्मी और भगवान शिव का साथ ही साथ चंद्रदेव का पूजन करना असीम आशीर्वाद प्रदान करता है।
  • कोजागरी महिमा: शरद पूर्णिमा को कोजागरी व्रत भी कहते हैं। इसका अर्थ है "कौन जाग रहा है?" मान्यता है कि इस रात्रि देवी लक्ष्मी पृथ्वी पर भ्रमण करती हैं और जो जागकर उनका ध्यान करते हैं उन्हें भंडार भर आशीष और धन-समृद्धि का आशीर्वाद मिलता है।

पूजन विधि और परंपराएँ

  1. पवित्र स्नान: प्रातः ब्रह्ममुहूर्त में नदी या गंगा-स्नान करना पाप नाशक तथा आत्मिक शुद्धि का साधन माना जाता है। यह शरीर को रोगों से मुक्त करता और आत्मा को निर्मल बनाता है।
  2. शुद्ध वस्त्र धारण: स्नान उपरांत स्वच्छ या नये वस्त्र धारण करने से पवित्रता प्राप्त होती है और यह देवी-देवताओं का आशीर्वाद पाने का पहला चरण है।
  3. उपवास एवं संयम: अनेक लोग इस दिन उपवास रखते हैं या केवल फलाहार करते हैं। उपवास आत्मसंयम का प्रतीक है और यह मन को स्थिर और पवित्र बनाता है।
  4. पूजन: भगवान विष्णु, माता लक्ष्मी, भगवान शिव और चंद्र देव की पूजा की जाती है। दीप अर्पण, धूप, पुष्प और अक्षत चढ़ाकर उनका स्मरण किया जाता है।
  5. खीर बनाने की परंपरा: दूध, चावल और साबुत सफेद दाल से बनी खीर को मंदिर प्रांगण अथवा छत पर चांदनी के नीचे रखा जाता है। इसमें चंद्रकिरणों का औषधीय प्रभाव समाहित होता है।
  6. खीर प्रसाद सेवन: सुबह सूर्योदय पूर्व इस खीर को प्रसाद रूप में ग्रहण करने से शरीर रोगमुक्त और दीर्घायु होता है।
  7. दान का महत्व: इस दिन चावल, गेहूँ, फल, सब्ज़ियाँ, अन्न और वस्त्र दान करने से अपार पुण्य प्राप्त होता है। दान द्वारा समाज में सद्भाव और सेवा भाव भी जागृत होता है।

सांस्कृतिक और ऋतु संबंधी महत्व

  • शरद पूर्णिमा शरद ऋतु के आगमन का प्रतीक है। यह ऋतु कृषि और आगामी फसल के लिए महत्वपूर्ण होती है। इस दिवस को किसान अपनी आगामी ऋतु की प्रगति और सफलता के लिए भगवान की कृपा प्राप्त करने हेतु धन्यवाद स्वरूप पूजन करते हैं।
  • धार्मिक विश्वासों के अनुसार, इस दिन रासलीला का भी महत्त्व है। श्रीकृष्ण ने इस रात वृंदावन की गोपियों के साथ रास रचाया था। यह दिव्य प्रेम और पूर्ण समर्पण का प्रतीक है।
  • इस रात भक्त जागरण करते हैं, भजन-कीर्तन करते हैं और माता लक्ष्मी की कृपा प्राप्त करते हैं। जागरण का तात्पर्य है आध्यात्मिक रूप से सतर्क बनना और ईश्वर की उपस्थिति अनुभव करना।

शरद पूर्णिमा 2025 का सार

वर्ष 2025 की शरद पूर्णिमा 6 अक्टूबर को आ रही है। यह दिन श्रद्धा, संयम और भक्ति का पावन अवसर है। यह पर्व हमें स्वास्थ्य, धन, समृद्धि और आध्यात्मिक जीवन के महत्व को समझाता है। इस रात का उज्ज्वल चंद्र प्रकाश ब्रह्मांड और मनुष्य के जीवन के बीच दिव्य संबंध का प्रतीक है।

प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1: शरद पूर्णिमा 2025 कब है?
उत्तर: सोमवार, 6 अक्टूबर 2025 को।

प्रश्न 2: पूर्णिमा तिथि कब से कब तक रहेगी?
उत्तर: 6 अक्टूबर दोपहर 12:23 बजे से 7 अक्टूबर प्रातः 9:16 बजे तक।

प्रश्न 3: शरद पूर्णिमा की रात चंद्रमा की क्या विशेषता होती है?
उत्तर: इस रात चंद्रमा सोलह कलाओं से पूर्ण होता है और उसकी किरणें अमृतमयी तथा औषधीय शक्ति से युक्त होती हैं।

प्रश्न 4: खीर चांदनी में क्यों रखी जाती है?
उत्तर: ताकि उसमें चंद्रकिरणों की अमृत शक्ति समाहित हो जाए और प्रसाद के रूप में सेवन करने पर यह रोगनाशक बने।

प्रश्न 5: कोजागरी रात्रि का क्या महत्व है?
उत्तर: इस रात देवी लक्ष्मी जागरण करने वाले और भक्ति भाव रखने वाले श्रद्धालुओं को धन, समृद्धि और आशीर्वाद प्रदान करती हैं।

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पं. नरेंद्र शर्मा

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