By अपर्णा पाटनी
चौथे भाव में सूर्य की उपस्थिति घर, सुख-सुविधा, पारिवारिक नेतृत्व, संपत्ति और आंतरिक संघर्ष के गहरे असर को उजागर करती है

वैदिक ज्योतिष में चौथा भाव जीवन की जड़ों का स्थान माना गया है। इस भाव में माता, घर, मानसिक शांति, विरासत और भावनात्मक स्थिरता का संसार जुड़ा है। जब सूर्य जैसा तेजस्वी ग्रह इस भाव में आता है तो घर का वातावरण गर्माहट और प्रकाश से प्रभावित होता है। कभी यह स्थिति परिवार में स्थिरता लाती है और कभी चुनौतियाँ भी पैदा कर सकती है। इसलिए इस स्थान का प्रभाव समझना आवश्यक है।
सूर्य को आत्मा और पिता का प्रतीक माना गया है। यह स्वाभिमान और नेतृत्व को दर्शाता है। जब यह ग्रह चतुर्थ भाव में स्थित होता है तो व्यक्ति में परिवार के प्रति सुरक्षा और जिम्मेदारी की भावना बढ़ जाती है। शुभ स्थिति में यह अवसर बढ़ाता है। अशुभ प्रभाव हो तो भावनात्मक असंतुलन और अहंकार उत्पन्न हो सकता है।
वैदिक ज्योतिष में सूर्य ग्रह: प्रकाश, प्राण और प्रतिष्ठा का प्रतीक
यह ग्रह व्यक्ति को परिवार में मार्गदर्शक की भूमिका प्रदान करता है। निर्णयों में इसकी उपस्थिति महत्वपूर्ण होती है। कई बार यह स्थिति परिवार में स्थिरता लाती है। कभी कभी अधिकार की अधिकता तनाव उत्पन्न कर सकती है। इसलिए संवाद बनाए रखना आवश्यक है।
यह स्थिति अचल संपत्ति और पैतृक संपत्ति में लाभ के योग बनाती है। नीचे दिए गए तालिका से लाभ स्पष्ट होते हैं।
| क्षेत्र | संभावित लाभ |
|---|---|
| पैतृक संपत्ति | जमीन और भवन से लाभ |
| अचल संपत्ति | दीर्घकालिक स्थिरता |
| आर्थिक स्थिति | सुविधाओं में वृद्धि |
प्रशासन, सरकारी कार्य, राजनीति और रियल एस्टेट में सफलता की संभावना बढ़ती है। नेतृत्व क्षमता अच्छी होती है। समाज में सम्मान मिलता है। स्वतंत्र व्यवसाय भी लाभकारी हो सकता है।
सूर्य व्यक्ति को सेवा, दान और धर्म की ओर प्रेरित करता है। भोजन वितरण और मंदिर सेवा मानसिक शांति प्रदान करते हैं। इससे धैर्य और भावनात्मक संतुलन बढ़ता है।
अहंकार
माता से मतभेद
भावनात्मक अस्थिरता
हृदय और रक्तचाप संबंधी समस्याएँ
विवाह में तनाव
गलत आर्थिक निर्णय
| क्षेत्र | विशेषता |
|---|---|
| प्रशासन | नेतृत्व क्षमता |
| रियल एस्टेट | संपत्ति प्रबंधन की समझ |
| राजनीति | सार्वजनिक प्रभाव |
महत्वाकांक्षा विवाह में विलंब ला सकती है। विवाह के बाद जिम्मेदारियाँ बढ़ती हैं। संवाद की कमी दूरी पैदा कर सकती है। भावनाओं को साझा करना आवश्यक है।
हरी सब्जियाँ और दूध का सेवन करें। सूर्य नमस्कार और प्राणायाम लाभकारी हैं। तैलीय भोजन कम करें।
ॐ घृणि सूर्याय नमः
प्रतिदिन एक सौ आठ बार जप शुभ माना जाता है।
रविवार को गेहूँ, गुड़ और ताँबा दान करना शुभ है।
परिवार को समय दें। विनम्रता अपनाएँ। संवाद बनाए रखें।
यह स्थिति बताती है कि घर केवल दीवारों से नहीं बनता। प्रेम, संवाद और संतुलन घर को पूर्ण बनाते हैं। संपत्ति महत्त्वपूर्ण है पर मन की शांति और परिवार का समर्थन सबसे मूल्यवान है।
क्या चौथे भाव में सूर्य हमेशा नेतृत्व करवाता है
हाँ नेतृत्व क्षमता बढ़ती है पर संतुलन आवश्यक है
क्या इस स्थिति से पैतृक संपत्ति का लाभ मिलता है
अक्सर पैतृक भूमि या भवन से लाभ प्राप्त होता है
क्या विवाह में तनाव बढ़ सकता है
यदि संवाद कम हो या अहंकार अधिक हो तो तनाव संभव है
क्या स्वास्थ्य प्रभावित होता है
हृदय, तनाव और रक्तचाप संबंधी समस्याएँ हो सकती हैं
सूर्य की कृपा का सरल उपाय क्या है
ॐ घृणि सूर्याय नमः का जप और रविवार को दान
सूर्य राशि मेरे बारे में क्या बताती है?
मेरी सूर्य राशिअनुभव: 15
इनसे पूछें: पारिवारिक मामले, मुहूर्त
इनके क्लाइंट: म.प्र., दि.
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