By पं. नरेंद्र शर्मा
ज्योतिष में सूर्य से जुड़े कृत्तिका, उत्तरा फाल्गुनी और उत्तराषाढ़ा नक्षत्रों का गहरा विश्लेषण

वैदिक ज्योतिष में सूर्य वह ज्योति है जो आत्मा, चेतना, तेज, उद्देश्य और जीवन शक्ति का प्रतिनिधित्व करती है। सूर्य केवल राशि का स्वामी नहीं बल्कि तीन महत्त्वपूर्ण नक्षत्रों का अधिपति भी है। ये नक्षत्र हैं कृत्तिका, उत्तरा फाल्गुनी और उत्तराषाढ़ा। इन तीनों नक्षत्रों की प्रकृति, देवता, प्रतीक और प्रभाव सूर्य की ही तरह तेजस्वी, प्रेरणादायी और परिवर्तनशील हैं।
सूर्य के इन नक्षत्रों में जन्म लेने वाला जातक भीतर से दृढ़, उद्देश्यपूर्ण, कर्मशील और समाज में प्रभावशाली माना जाता है।
वैदिक ज्योतिष में सूर्य ग्रह: प्रकाश, प्राण और प्रतिष्ठा का प्रतीक
अग्नि, शुद्धता और नेतृत्व का प्रतीक
अग्निदेव, जो तेज और शुद्धता के प्रतिरूप हैं।
कृत्तिका नक्षत्र को अग्नि का द्वार कहा गया है। यह वही स्थान है जहाँ शिव पार्वती के पुत्र कार्तिकेय का पालन पोषण छह कृत्तिका अप्सराओं द्वारा हुआ। इसी कारण कार्तिकेय को कृत्तिकेय नाम प्राप्त हुआ।
यह नक्षत्र जन्म से ही तेज, साहस और अडिग संकल्प प्रदान करता है।
अग्नि बनो लेकिन वह अग्नि जो प्रकाश और शुद्धता दे, विनाश नहीं।
मित्रता, विवाह और सामाजिक सेवा का प्रतीक
आर्यमा – पितरों, अनुबंधों और सामाजिक संतुलन के देवता।
शिव और पार्वती का दिव्य विवाह इसी नक्षत्र में सम्पन्न हुआ था। यह नक्षत्र साझेदारी, अनुबंध, विवाह और सहयोग का प्रतीक माना गया है।
संबंधों को निभाना भी एक कला है। सेवा, सहानुभूति और संतुलन ही जीवन के सच्चे स्तंभ हैं।
धर्म, नीति, विजय और आध्यात्मिक उन्नति का सूचक
विश्वेदेव – दस सार्वभौमिक शक्ति समूह।
उत्तराषाढ़ा का अर्थ है अविनाशी विजय। यह वह नक्षत्र है जहाँ प्रयास कभी व्यर्थ नहीं जाता। यह नक्षत्र धर्म, नीति, आध्यात्मिक जागरण और सच्चे ज्ञान का मार्ग बताता है।
विजय वह नहीं जो बाहर दिखे, विजय वह है जो भीतर आत्मा में खिलती है।
इन तीनों नक्षत्रों का प्रभाव जातक के जीवन में विशेष गुण उत्पन्न करता है।
सूर्य के नक्षत्रों में जन्मे जातक:
ये जातक जीवन में बड़ी उपलब्धियों के लिए जन्मे माने जाते हैं।
कृत्तिका की अग्नि आत्मबल देती है
उत्तरा फाल्गुनी का सौम्य भाव प्रेम और सेवा सिखाता है
उत्तराषाढा की नीति आत्मज्ञान और सत्य की ओर ले जाती है
सूर्य के नक्षत्र आत्मा को तेज, दिशा और अर्थ प्रदान करते हैं।
सूर्य कृत्तिका, उत्तरा फाल्गुनी और उत्तराषाढ़ा का स्वामी है।
इन नक्षत्रों का प्रभाव व्यक्ति में नेतृत्व, सेवा और ज्ञान की शक्ति भर देता है।
उचित ज्योतिषीय उपाय और सकारात्मक दृष्टिकोण से सूर्य की कृपा अत्यंत प्रबल हो सकती है।
1. सूर्य कितने नक्षत्रों का स्वामी है
सूर्य तीन नक्षत्रों का स्वामी है कृत्तिका, उत्तरा फाल्गुनी और उत्तराषाढ़ा।
2. सूर्य के नक्षत्रों में जन्मे लोग कैसे होते हैं
नेतृत्ववान, उद्देश्यपूर्ण, सामाजिक और आध्यात्मिक प्रवृत्ति वाले।
3. कृत्तिका नक्षत्र का मुख्य गुण क्या है
तेज, अग्नि, साहस और निर्णायक क्षमता।
4. उत्तरा फाल्गुनी नक्षत्र किससे जुड़ा है
विवाह, संबंध, साझेदारी, मित्रता और सामाजिक प्रतिष्ठा से।
5. उत्तराषाढ़ा नक्षत्र का आध्यात्मिक संदेश क्या है
सिद्धांतों पर आधारित जीवन और सच्ची आत्मिक विजय ही वास्तविक सफलता है।
जन्म नक्षत्र मेरे बारे में क्या बताता है?
मेरा जन्म नक्षत्र
अनुभव: 20
इनसे पूछें: पारिवारिक मामले, करियर
इनके क्लाइंट: पंज., हरि., दि.
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