By पं. नीलेश शर्मा
गुप्त नवरात्रि में सिद्धि और आत्मिक जागरण की शक्ति, दस महाविद्याओं की साधना और जीवन बदलने वाली कथा

गुप्त नवरात्रि सनातन धर्म का अत्यंत रहस्यमयी और शक्तिशाली साधना पर्व है जिसे तंत्र मन्त्र सिद्धि और गहन शक्ति उपासना के लिए जाना जाता है। यह काल उन साधकों के लिए विशिष्ट माना जाता है जो मां दुर्गा की दस महाविद्याओं और ब्रह्मांडीय ऊर्जा के रहस्यों को जानना चाहते हैं। इस अवधि में की गई साधना सामान्य नवरात्रि की तुलना में अधिक प्रभावी मानी जाती है।
आरंभ। 26 जून 2025 गुरुवार
समापन। 4 जुलाई 2025 शुक्रवार
घटस्थापना मुहूर्त। 26 जून सुबह 5।25 से 6।58
अभिजीत मुहूर्त। 11।56 से 12।52
कृतिका नक्षत्र: अग्नि, शुद्धि और नेतृत्व का वैदिक प्रतीक
गुप्त नवरात्रि का अर्थ है गोपनीय साधना का काल। यह पर्व मुख्य रूप से उन साधकों द्वारा मनाया जाता है जो दस महाविद्याओं की साधना द्वारा गूढ़ सिद्धियां प्राप्त करना चाहते हैं।
दस महाविद्याएँ। काली तारा षोडशी भुवनेश्वरी छिन्नमस्ता त्रिपुर भैरवी धूमावती बगलामुखी मातंगी कमला।
साधारण भक्तों के लिए यह पर्व मनोकामना पूर्ति रोग शांति शत्रु निवारण आर्थिक उन्नति और आत्मिक जागरण का श्रेष्ठ अवसर प्रदान करता है।
एक स्त्री जिसका पति व्यसन में लिप्त था ऋषि श्रृंगी के पास पहुंची और धर्म तथा भक्ति का मार्ग पूछने लगी।
ऋषि श्रृंगी ने कहा कि जैसे प्रकट नवरात्रि में नौ रूपों की पूजा होती है वैसे ही गुप्त नवरात्रि में दस महाविद्याओं की साधना की जाती है।
स्त्री ने श्रद्धापूर्वक यह साधना की और उसके जीवन में सुख शांति और समृद्धि लौट आई। यह कथा बताती है कि इस अवधि की साधना असंभव को भी संभव बना सकती है।
प्रातः स्नान करें और लाल या पीले वस्त्र धारण करें।
पूजा स्थल को शुद्ध करें।
शुभ मुहूर्त में कलश स्थापित करें।
कलश में गंगाजल सुपारी सिक्का आम पत्ते और नारियल रखें।
मां दुर्गा और दस महाविद्याओं की प्रतिमा स्थापित करें।
लाल पुष्प कुमकुम अक्षत चंदन दीप धूप और नैवेद्य अर्पित करें।
महाविद्याओं के बीज मन्त्रों का जाप करें।
प्रतिदिन सप्तशती कवच अर्गला कीलक आरती और प्रार्थना करें।
सात्विक आहार रखें।
मांसाहार प्याज लहसुन मदिरा झूठ क्रोध विवाद काले वस्त्र चमड़ा बाल और नाखून काटना वर्जित है।
ब्रह्मचर्य और मानसिक शुद्धता का पालन करें।
अष्टमी या नवमी को कन्या पूजन करें।
वस्त्र भोजन मिठाई और दक्षिणा अर्पित करें।
इस अवधि में चंद्रमा मंगल और राहु केतु की स्थिति साधना के लिए विशेष मानी जाती है।
राशि अनुसार उपाय।
मेष। लाल चुनरी
वृषभ। नौ प्रकार का भोग
मिथुन। हरी चूड़ी और चुनरी
कर्क। सप्तशती पाठ
सिंह। लाल पुष्प
कन्या। दुर्गा चालीसा
तुला। दान
वृश्चिक। पान का भोग
धनु। गोमती चक्र और नारियल
मकर। शिवलिंग पर लौंग
कुंभ। चालीसा
मीन। लाल चुनरी
पूजा में श्रद्धा गोपनीयता और एकाग्रता रखें।
कन्या ब्राह्मण पशु पक्षी और अतिथि का सम्मान करें।
घर में दीपक स्वच्छता और सकारात्मकता बनाए रखें।
मांस मदिरा तामसिक भोजन झूठ क्रोध विवाद काले वस्त्र चमड़ा बाल नाखून काटना दिन में सोना और व्रत भंग न करें।
गुप्त नवरात्रि आत्मा की शुद्धि मन की शक्ति और अंतर्निहित दिव्यता को जगाने का पर्व है। दस महाविद्याओं की उपासना जीवन में विजय सुरक्षा समृद्धि और आध्यात्मिक जागरण का मार्ग खोलती है।
गुप्त नवरात्रि को गुप्त क्यों कहा जाता है
साधना मन्त्र और विधियां गोपनीय रखी जाती हैं क्योंकि यह तांत्रिक और अत्यधिक शक्तिशाली काल माना जाता है।
क्या सामान्य भक्त भी गुप्त नवरात्रि कर सकते हैं
हाँ सात्विक आहार और नियमों का पालन करते हुए कोई भी भक्ति कर सकता है।
दस महाविद्याओं की साधना क्यों विशेष है
ये देवियाँ ब्रह्मांड की दस मूल शक्तियों का प्रतिनिधित्व करती हैं और साधक को भय अज्ञान और बाधाओं से मुक्त करती हैं।
क्या गुप्त नवरात्रि में सप्तशती अनिवार्य है
साधना की शक्ति बढ़ाने के लिए सप्तशती का पाठ अत्यंत प्रभावशील माना जाता है।
इस अवधि में सबसे बड़ा लाभ क्या माना गया है
मनोकामना पूर्ति आत्मबल वृद्धि बाधा निवारण और आध्यात्मिक उन्नति को प्रमुख लाभ माना गया है।
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