By पं. अभिषेक शर्मा
देवी काली की आराधना और नरक चतुर्दशी का आध्यात्मिक महत्व

काली चौदस, जिसे नरक चतुर्दशी, भूत चतुर्दशी, रूप चौदस और छोटी दिवाली के नाम से भी जाना जाता है, दीपावली के पाँच दिवसीय पर्व का दूसरा दिन होता है। यह दिन कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को आता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, काली चौदस देवी काली की पूजा के लिए समर्पित दिन है और यह बुराई, अंधकार और नकारात्मक ऊर्जाओं पर अच्छाई, प्रकाश और सकारात्मक शक्तियों की विजय का प्रतीक है। इसे उन तिथियों में गिना जाता है जो साधक को बाधाओं से मुक्ति एवं सुरक्षा की शक्ति प्रदान करती हैं। यह पर्व दीपावली के प्रमुख उत्सव लक्ष्मी पूजन से पहले आत्मिक, मानसिक और शारीरिक शुद्धि का प्रतिनिधित्व करता है।
इस प्रकार पूजा और मुख्य अनुष्ठान 19 अक्टूबर की संध्या और निशीथ काल में सम्पन्न होंगे। 20 अक्टूबर की प्रातः बेला भी पूजा-अर्चना हेतु श्रेष्ठ बताई गई है।
नरकासुर असुर ने देवताओं और मानवों दोनों को आतंकित कर रखा था। उसने अनेक दिव्य कन्याओं को बंदी बना लिया था। भगवान श्रीकृष्ण ने मां काली की ऊर्जा से शक्ति प्राप्त कर नरकासुर का वध किया। इस विजय से सभी बंधक मुक्त हुए और भय का अंत हुआ। इसलिए इस दिन दीपक जलाकर और आतिशबाजी कर हर्षोल्लास से उत्सव मनाया जाता है।
काली चौदस 2025 का पर्व रविवार, 19 अक्टूबर को मनाया जाएगा। यह दीपावली से एक दिन पूर्व देवी काली की उपासना का पर्व है। इस दिन काली पूजन, दीपदान, तंत्र शुद्धि, अभ्यंग स्नान और मंत्रजाप से साधकों को साहस, आत्मबल और नकारात्मक शक्तियों से सुरक्षा की प्राप्ति होती है।
प्रश्न 1: काली चौदस 2025 कब मनाई जाएगी?
उत्तर: रविवार, 19 अक्टूबर 2025 को। चतुर्दशी तिथि 19 अक्टूबर को दोपहर 1:51 बजे प्रारंभ होकर 20 अक्टूबर को 3:44 बजे समाप्त होगी।
प्रश्न 2: इस दिन पूजा का सबसे शुभ समय कब है?
उत्तर: निशीथ काल में रात्रि 11:57 से 12:47 बजे तक, ब्रह्म मुहूर्त (4:56 - 5:45) और विजय मुहूर्त (2:18 - 3:04) विशेष शुभ हैं।
प्रश्न 3: काली चौदस का पौराणिक आधार क्या है?
उत्तर: यह दिन नरकासुर दैत्य के वध और असुरों से मुक्ति का प्रतीक है। इसे अच्छाई और प्रकाश की विजय का दिन माना जाता है।
प्रश्न 4: काली चौदस को रूप चौदस क्यों कहा जाता है?
उत्तर: क्योंकि इस दिन स्त्रियाँ उबटन, स्नान और सौंदर्य की विशेष साधना करती हैं। यह शारीरिक और आत्मिक पवित्रता का प्रतीक है।
प्रश्न 5: इस दिन की जाने वाली प्रमुख परंपराएँ क्या हैं?
उत्तर: अभ्यंग स्नान, दीपदान, देवी काली की पूजा, मंत्रजाप, हनुमान पूजन और कुछ क्षेत्रों में तांत्रिक साधना।
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