By पं. सुव्रत शर्मा
जानिए 8 और 9 अगस्त को व्रत, स्नान-दान और राखी का शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और इस दिन के विशेष योग

सावन की उमस भरी हवाएं, वातावरण में शीतलता और मंदिरों की घंटियों की मधुर ध्वनि सावन पूर्णिमा को आध्यात्मिक ऊर्जा से भर देती है। यह केवल एक पूर्णिमा नहीं, बल्कि वह क्षण है जब प्रकृति भक्तिभाव के साथ मन को शांत करती है। वर्ष 2025 में सावन पूर्णिमा 8 और 9 अगस्त के बीच होगी और इसी अवधि में रक्षाबंधन का पर्व भी आने से इस तिथि का महत्व अत्यधिक बढ़ जाता है।
पूर्णिमा प्रारंभ: 8 अगस्त 2025, दोपहर 2:12 बजे
पूर्णिमा समाप्ति: 9 अगस्त 2025, दोपहर 1:24 बजे
व्रत आरंभ: 8 अगस्त, शुक्रवार
स्नान और दान का श्रेष्ठ समय: 9 अगस्त, सुबह 4:22 से 5:04 बजे
हिंदू सिद्धांतों के अनुसार, तिथि का मूल निर्धारण सूर्योदय से होता है। अतः स्नान, दान और पूजा करने का सर्वश्रेष्ठ काल 9 अगस्त को माना गया है।
• व्रत 8 अगस्त को रखा जाएगा।
• शाम को चंद्र दर्शन (लगभग 6:42 बजे) के समय शिव और चंद्रदेव को अरघ्य अर्पित करें।
• इससे मानसिक शांति बढ़ती है और रोगों का नाश होता है।
सावन पूर्णिमा पर रूद्राभिषेक करने से विघ्न दूर होते हैं और साधक की मनोकामनाएँ पूर्ण होती हैं। इस दिन शिवलिंग का जल, दूध, दही, घी, शहद और गंगाजल से अभिषेक अत्यंत शुभ माना जाता है।
• इस वर्ष कोई भद्रा दोष नहीं रहेगा।
• राखी बांधने का श्रेष्ठ समय: 9 अगस्त सुबह 5:47 से दोपहर 1:24 बजे तक
इस दिन तीन प्रमुख योग बनेंगे:
इन योगों में किए गए कार्य अत्यंत सफल माने जाते हैं। 10 अगस्त से पंचक आरंभ होगा, जो पाँच दिनों तक कुछ कार्यों का निषेध करता है।
| विषय | विवरण |
|---|---|
| पूर्णिमा तिथि | 8 अगस्त 2:12 PM से 9 अगस्त 1:24 PM |
| व्रत प्रारंभ | 8 अगस्त, शुक्रवार |
| स्नान व दान | 9 अगस्त 4:22 AM – 5:04 AM |
| राखी मुहूर्त | 5:47 AM – 1:24 PM |
| विशेष योग | सौभाग्य, शोभन, सर्वार्थ सिद्धि |
सावन पूर्णिमा और रक्षाबंधन का यह दिव्य संगम श्रद्धालुओं के लिए आस्था, भक्ति और आध्यात्मिक उन्नति का श्रेष्ठ अवसर है। इस दिन नियम, व्रत और दान से जीवन में सुख, शांति और सौभाग्य का प्रवेश होता है।
1. क्या सावन पूर्णिमा का व्रत दोनों दिन रखा जा सकता है?
व्रत 8 अगस्त को रखा जाएगा, जबकि पूजा और स्नान का श्रेष्ठ काल 9 अगस्त को है।
2. क्या रक्षाबंधन पर भद्रा दोष होगा?
नहीं, इस वर्ष भद्रा दोष का प्रभाव बिल्कुल नहीं है।
3. क्या रूद्राभिषेक केवल पुरुष कर सकते हैं?
नहीं, पुरुष, महिलाएँ और दंपत्ति सभी इस अभिषेक का फल प्राप्त कर सकते हैं।
4. क्या राखी केवल शुभ मुहूर्त में बाँधना आवश्यक है?
हाँ, श्रेष्ठ फल के लिए मुहूर्त का पालन करना शुभ माना गया है।
5. क्या पंचक का प्रभाव रक्षाबंधन पर पड़ेगा?
नहीं, पंचक 10 अगस्त से प्रारंभ होगा। रक्षाबंधन 9 अगस्त को पूर्णतः शुभ रहेगा।
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