By पं. सुव्रत शर्मा
पंचम भाव में राहु के शुभ-अशुभ प्रभाव, प्रेम, शिक्षा, निवेश और उपाय

वैदिक ज्योतिष में पंचम भाव को शिक्षा, बुद्धि, प्रेम, संतान, रचनात्मकता और सट्टा निवेश का भाव माना जाता है। जब राहु इस भाव में स्थित होता है, तो यह व्यक्ति के विचारों, रचनात्मक अभिव्यक्ति और संबंधों पर गहरा प्रभाव डालता है। इसकी स्थिति जन्म कुंडली में शुभ या अशुभ होने पर जीवन की दिशा को सकारात्मक या नकारात्मक दोनों तरह से मोड़ सकती है।
छठे भाव में राहु का क्या प्रभाव होता है और यह स्वास्थ्य, करियर और संघर्षों को कैसे प्रभावित करता है
पंचम भाव का सीधा संबंध दिल के मामलों से होता है।
| राशि | प्रभाव |
|---|---|
| वृषभ | उच्च राहु अत्यधिक धन, गुप्त आय, विदेशी सौदों से लाभ और करियर में उन्नति देता है। |
| वृश्चिक | नीच राहु गुप्त विद्या, रहस्यमय कार्य और गोपनीय सेवाओं में दक्षता देता है, परंतु मानसिक स्थिरता घटा सकता है। |
| योग | विवरण |
|---|---|
| अंगारक योग | राहु और मंगल की युति से बनने वाला यह योग भाई-बहनों के साथ तनाव और क्रोधपूर्ण स्वभाव ला सकता है। |
| पद्म कालसर्प योग | राहु पंचम भाव में और केतु एकादश भाव में हो तो प्रेम संबंधों में बाधा, शिक्षा में कठिनाई और जीवनसाथी के स्वास्थ्य में समस्या ला सकता है। |
प्र1: क्या पंचम भाव का राहु सट्टा निवेश में लाभ देता है?
हाँ, शुभ स्थिति में यह सही निवेश से अप्रत्याशित लाभ देता है।
प्र2: क्या यह प्रेम संबंधों को प्रभावित करता है?
हाँ, यह रिश्तों में जुनून और अस्थिरता ला सकता है।
प्र3: क्या पंचम भाव का राहु शिक्षा में बाधा डालता है?
हाँ, ध्यान केंद्रित करने में कठिनाई और पढ़ाई में रुकावट संभव है।
प्र4: अंगारक योग क्या है?
राहु और मंगल की युति से बनने वाला यह योग संबंधों में तनाव और क्रोधपूर्ण स्वभाव ला सकता है।
प्र5: राहु की अशुभता कैसे कम करें?
राहु यंत्र की स्थापना, सतनाजा दान और गोमेद रत्न धारण इसके प्रभाव को संतुलित कर सकते हैं।
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